मैं जानती हूं तुम मुझे सुन सकते हो .....
फिर भी अनसुना कर चल देते हो ....
बहुत परवाह है तुम्हे मेरी ....
सुनो ना ???आज तो रुक जाओ ....
कह दो ना मेरी बेसबर होती धड़कनों को ..
मेरी बैचेन होती नजरो को ....
आज और कोई आवाज़ ना सुनाई दे मेरी कानों को
तेरी सांसों तेरी मदहोश धड़कनों के सिवा...
पता है तुम्हे ???
जब मेरे आंचल को ये शरारती हवाएं छेड़ती है
बिना तुमसे पूछे मेरे गालों को चूम लेती है
तुम्हारा नाम लेकर मुझे ना जाने कितने ताने देती है
जब भंवरा फूलों पर इतराता खुशबू हवाओं में होती है
मैं जानती हूं तुम सुन रहे हो ... अब तो रुक जाओ ना
बेताब होती आरती को थाम लो ना ...
आज तुम रुक जाओ ना