आजतक एक बात समझ नहीं आई
आखिर समझदार है कोन
वो जो हमें हमारे बैंक अकाउंट पर हमें जज करता है ?
या
वो जो हम किस गाड़ी से उसके पास जा रहे है , और इससे उसकी शान कितनी बड़ेगी ?
या
वो जो दोस्त भी ये सोचकर बनाता है कि ये आगे काम आएगा या नहीं ?
या
वो जो बाते तो बड़ी बड़ी करता है पर सिर्फ दूसरो को सुनाने के लिए ।
या
वो जो हर मुसीबत में साथ खड़े होने का सिर्फ दिखावा करता है और असलियत में हमारी ज़िंदगी के गम , उनके जीने की वजह है ।
या
वो जो वादे तो बहुत करता है , पर सिर्फ उस समय खुश करने के लिए , निभाने के लिए नहीं ।
या
वो जो बाते तो बहुत मीठी करता है और इतनी मीठी की डायबिटीज़ ही हो जाए ।
या
वो जिसके शब्दो से प्यार कि बरसात हो , और उसी बरसात के बाद हुए कीचड़ को , किसी और के सामने हमारे लिए ही इस्तेमाल किया जाए ।
समझ ही नहीं आता
आखिर समझदार है कौन !!!!