मेरी ख्वाहिशों के कब्र पर,
कुछ फूल ही चढ़ा दो।
है हर तरफ़ अंधेरा,
एक चराग तो जला दो।
मैं थक गई बहुत हूं,
बस अब तो सब विदा दो।
मेरे आखिरी सफर पर,
दो कदम संग बढ़ा दो।
कोई आरजू न बाकी,
अब और मत सजा दो।
मेरे ख्वाबों के इस राख को,
अब खाक में मिला दो।
मेरे रूह को सुकून हो,
सब मिलके ये दुआ दो।
मशरूफ तुम बहुत हो,
दो अश्क़ तो बहा दो।