वक़्त की क्या बात है वक़्त वक़्त की बात है
वक़्त के सामने आदमी की क्या औकात है
वक़्त ही करता है सितम
वक़्त ही बनता है मरहम
वक़्त से आगे न कोई रहा है न कोई रहेगा
वक़्त कभी हँसाएगा तो कभी रुलाएगा
वक़्त के साथ आदमी को चलना पड़ेगा
वक़्त का पहिया सदा चलता ही रहेगा
वक़्त किसी के रोके न रुका है न रुकेगा