जख्म मेरे बढ़ते सीने के, वो दूर बैठ कर पहेचान लेती है,
साँस कम हो जीने मे, वो अपनी और से हवा की तरह लहरती है।
मेरे बीमार होने पे, वो अक्सर गुस्सा हो कर मुंह फुलाया करती है,
मेरे हर हिस्से में मरहम का किस्से बनके जिंदगी का पन्ना बदलती है।
DEAR ZINDAGI 💞