यार थोड़ा रुक तो सही , दो पल सुन तो सही
माना तू ज़िंदगी है मगर , कभी यादो की तरह एक पल ठहर तो सही ।
कभी थोड़ा रुककर , हल्का सा मुस्कुरा के
कंधे पे हाथ रखकर प्यार से थोड़ा समजा तो सही ,
माना तू जीन्दगी है, मगर कभी अपनी अकड़ छोड़ तो सही ।
क्यों उलझती जा रही है , एक पहेली की तरह
संभाल नही पाओगी बनके अजीब ये बात जान तो सही
माना तू ज़िन्दगी है मगर सरलता का दामन थाम तो सही।
रुकती नही कभी थमती नही, बहती ही जा रही है
चंचल नदी सी बन गई हो न जाने क्यों , समुन्दर की तरह शांत बनके देख तो सही ।
माना तू जिंदगी है मगर खुद की गहराई यो में एक पल जाख के देख तो सही।
सुन तो ले जाते जाते एक बात मेरी , मुझ से तू है ना कि तुज से में ,अगर टूटी में तो बिखरेगी तू भी इस सच्चाई को मान तो सही
माना तू ज़िन्दजी है मगर तू तू -में में कश्म कश से निकलकर 'हम ' से नाता जोड़ तो सही ।
ना तुझसे आगे ना तुजसे पीछे , चलना है बस साथ तेरे ,
सजना है तुजे , अपने ख़्वाबो से इस ख्वाब से रुबरु होने का मौका दे के देख तो सही
फिर देखना तू भी मेरी होगी और मंज़िल भी ये अहेसास करके देख तो सही।
माना तू जिंदगी है मगर कुछ नादानियां हमे भी करने की इजाज़त दे तो सही।
रंगिनता की किसे चाहत है यहा ,सादगी का श्रृंगार कर के देख तो सही ,
हस्ते हस्ते कर देंगे सजदा तेरे सामने वादा है मेरा
बस इसी बात पे विश्वास रख के देख तो सही ,
माना तू ज़िन्दजी है मगर...............
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