ये किसका पता है
जो लिखा है,
मन्दिर की मूर्ति पर
जो सजा है।
राह पर जो मिला है
शब्दों में जो चला है,
प्यार से जो दिखा है
ये किसका पता है!
जन्म के पास बैठता
सांसों के साथ चलता,
सुख-दुख की वीणा बजाता
ये किसका पता है!
मोह में मिला हुआ
गीत से भी जुड़ा हुआ,
हर नीति में बसा हुआ
ये किसका पता है!
*महेश रौतेला