तुजसे मिलकर मेने खुदा की लिखी नियति हाथ में कब कि पढ़ ली थी,
तू मेरे हिस्से में खुशियों से भरेगी वो जोली अक्सर आंखो में आइने की तरह उतार ली।
तू रहकर भी दूर जाए कभी नफ़रत ना करे इतनी सारी पाबंदियां मेरे हिस्से मे जाँख ली,
जरिया जोभी हो सीने में मैं धड़कु ऐसी दूर जाने की रिहाई में पर्वांगी माँग के हसी माँग ली।
DEAR ZINDAGI 💞🌹♥️