दर्जे इश्क़ के खुदा से खुद को कई बढ़कर मुझे दिए,
यूह हर किसीको वफाई के चर्चे सुनाकर सलमात तो है ना?
सदमे से निकले तो अरसे हो गए जैसे एक कबूल किया प्यार जहां में है?
और कहीं रुके मेरी मोहोब्बत के किस्से में कलम तो सोचना तेरी बेवफाई हिस्से में है क्या?
DEAR ZINDAGI 🤗