मुंह मोड़ लेती थी रोज वो,
मोहब्बत का इंतजार करती आंखों को देख कर,
चुपके से देखा उसने,
ना देख कर मुझे उसकी सांसे रुक गई,
सच कहते हैं मोहब्बत में किसी की तड़प,
किसी को खुश कर जाती है,
खुशी दे गई "मित्र" मुझे,
मुंह मोड़ लेती आंखें उसकी ,
मेरी तड़प से जब झुक गई
{✍️मनिष कुमार "मित्र" 🙏}