मुझे बचपन से ही उलझनों को सुलझाने का शौख था
और शायद रब यह जानता था
इसीलिए जिंदगी में इतनी उलझने है
पर रब यह नहीं जानता
की अब उलझनों को उलझाते- सुलझाते
हमने हमारे कई शौख गंवा दिए है
पर उलझनों को सुलझाने में अभी भी हम माहिर है
शायद अब हर उलझन से पहले ही उसे
सुलझाने का अंदाज़ हमें आ गया है
इसीलिए उलझन से उलझते ही
कई नई उलझने खड़ी हो जाती है... Bindu🌺
पर ऐ रब मुझे तुझ पर यकीन है
कि कोई भी उलझन हो तू मेरे साथ है...15/12/20