आज फिर से मां ने मेरे लिए दुवा ए मन्नत माँग ली,
आंखो मे चुभ सी रही खामोशियां की वजह माँग ली।
में कितना भी बड़ा परिंदा बन उड़ भी जाऊ इस जहां में,
काबिल ए दस्ता मेरी रूह से जुड़ कर हर वक्त नई जिंदगी माँगी।
अब कैसे लहू की परछाई ना जान सकू अपने जन्मदाता की,
वो मुझे सोते हुवे भी खुशी की सौगात खुदा से जोली फैलाकर माँगी।
हर कोई जलाता रहता उम्मीदों पर पानी फेरता,
जान कर अंजान बन कर नासमझ की जुस्तजू रखी।
वो मेरी दिल में चुभते अंगारे को भी अपने दिल से लगाकर,
खामोशियों में खुदा से सुकून भरे जज्बात की दुआ माँगी।
DEAR ZINDAGI 💞🌹