rekhta के सौजन्य से 🙏
हयात ले के चलो काएनात ले के चलो
चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो
..... मखदुम मुहिउद्दिन
न अपने ज़ब्त को रुस्वा करो सता के मुझे
ख़ुदा के वास्ते देखो न मुस्कुरा के मुझे
..... बिल्मिल अजिमाबाद
मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
.....अमीर कजलबाश
ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है
ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है
. ...इफ़्तिख़ार आरिफ़
अभी बाक़ी है बिछड़ना उस से
ना-मुकम्मल ये कहानी है अभी
. ...... तारिक कमर