" कविता "
जीवन है एक पहेली,
जहाँ हैं सुख और दुख
यहाँ किसी को है खुशी मिली,
और किसी को दुख ।
हर कोई करे यही कामना,
कि वह सदा रहे खुश ।
पर यदि ऐसा मुनकिन होता ,
तो हर किसी के पास पैसा होता
हर किसी के मन में लालच और पाप है,
बहुत कम ही होगें जिनका मन निष्पाप है ।
चलो आओ इस जीवन को जीते हैं ,
इस जीवन को खुशी से भरने का प्रण लेते हैं ।
ना हो सुंदर वस्र की कामना ,
और ना हो किसी धन की भावना ।
तो ही वह मनुष्य सदा रहेगा खुश,
क्योकि उसे नहीं होगी किसी धन की भूख ।
-कुनिष्का सिंघल