जिस इंसान के लिए मेरी भावनाओं का कोई मोल नहीं,मैं उससे बात क्यों करूँ,
जिस इंसान को खुदके लिए मेरे बेशुमार व बेइंतिहा प्यार से कोई फर्क नहीं मैं उससे बात क्यों करूँ,जो सब भूलकर आगे बढ़ चुका मैं उससे बात क्यों करूं, जब तक ये भावना खुदमें नही लाऊंगा तब तक खुदको कष्ट ही देता रहूँगा!