💐💐एक विचार💐💐
इस आभासी दुनिया में स्त्री रूपी नदी हर घाट (पुरुष का आभासी संपर्क) के किनारों से बहती है।विभिन्न घाटों पर नदी के साथ नाना प्रकार का आचरण होता है।कोई नदी की पवित्रता बनाये रखता है,तो कोई आचमन कर स्वयं को पवित्र करता है। कोई घाट स्वंय की कलुषता को धोकर निर्मल धारा को अपवित्र करने का प्रयास करता है। यहाँ दोष नदी का नहीं , घाट का होता है पर दोषारोपण फिर भी नदी पर किया जाता है।।
-Sakhi