नहीं हंस सकोगे दिवानों पे फिर तुम
तुम्हें दर्द दिल का पता जब चलेगा।
नहीं है तमन्ना गले वो लगाये
बड़ी बात होगी जो पहचान लेगा।
हरिक सम्त है धूप मतलब की फैली
ये रिश्तों का अंकुर भला क्या बचेगा।
मुझे लूटकर तू बड़ा खुश है लेकिन
तू रोयेगा जब कोई तुझको ठगेगा।
ऋषिपाल धीमान ऋषि