मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है
मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पस-ए-आइना कोई और है
(सर-ए-आईना = आईने के सामने), (अक्स = प्रतिबिम्ब, परछाई), (पस-ए-आइना = आईने के पीछे)
मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये जुदाई भी है मिलाप सी
मुझे क्या पता, मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है
(चाप = तेज़ आवाज़)
न गए दिनों को ख़बर मेरी, न शरीक-ए-हाल नज़र तेरी
तेरे देस में, मेरे भेस में, कोई और था कोई और है
(शरीक-ए-हाल = संगी, साथी, हर अवस्था में साथ रहनेवाला)
वो मेरी तरफ़ निगराँ रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है
(निगराँ = १) निरीक्षक, जाँच-पड़ताल करने वाला, २) संरक्षक, देख-रेख करने वाला, ३) प्रतीक्षातुर, रास्ता देखने वाला)
न मकाम का, न पड़ाव का, ये हयात नाम बहाव का
मिरी आरज़ू न पुकार तू, मिरा रास्ता कोई और है
(हयात = जीवन)
- मुज़फ़्फ़र वारसी