तुम शायद भूल चुकी हो मुजे अभी भी याद है वो पहली और आखरी मुलाकात पता है मिलोगी नही लेकिन तुम्हारी एक जलक् देखने के लिए आज भी बेताब है हम
निगाहें तुम्हारी यू खंजर जैसी आज भी कटने के लिए तैयार है हम
पता है की वापिस कभी भी नही आओगे तुम लेकिन अभी भी आशा लगाए बेठे है की आखरी बार ही सही मिलने आओगी तुम
-Rajgor krunal