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रंजिशों के साथ मेरी जान रिस्ता गेहरा भी रहा है
कौइ समझे आप की तारीफ,वैसे पेहरा भी रहा है
यूं बिछडनां आपसे हों,आंखमें भी बेबसी हों, बतादे
मामला संभाल कर, नाराज वैसे चेहरा भी रहा है
मान लीजीएँ हमारी मजबुरी है, केहना अजनबी से
जान के भी जानबाजी राझ बीना शेहरा भी रहा है
कुंछ ईम्तिहान देने की जरूरत है -रहीं है अमानत
आपकी तो याद ताजा कान कीस्सा बेहरा भी रहा है
काश सांसे छोड कर भी बोल पाते, वो हमारी तबाही
बीक जाते मौत के पैगाम जीना
ठेहरा भी रहा है
जागृति मारु "जागु"
ता १६/११/२०२०
छोड दीगे अख कभीभी