शानदार कविता ..
# विषय .सांवला ..
सांवला जब मेरे ,साथ है ।
तो डरने की ,क्या बात है ।।
उसने पकडा ,मेरा हाथ है ।
फिर रोने की ,क्या बात है ।।
वह मेरे ,आगे आगे चलता है ।
फिर राह भुलने ,की क्या बात है ।।
मेरे हर ख्वाब ,वो सजाता है ।
फिर याद करने ,की क्या बात है ।।
मैं क्यूँ भटकूँ ,इधर उधर ।
जब उसके चरणो ,की आश है ।।
संसार का नाता ,तो झुठा है ।
जब सच्चा रिश्ता ,उसके साथ है ।।
हर संकट का वो ,साथी है ।
फिर धबराने की ,क्या बात है ।।
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