आ बैठ जिंदगी तुझसे बंटवारा कर लेते हैं
आधी काट दी, आधी से किनारा कर लेते हैं।
मुक़म्मल एक भी ख्वाब न होने दिया तूने
अब खुद को हम बेसहारा कर लेते हैं।
जितना भी गम उठाया है जिंदगी मेरे लिये
आ सब का हिंसाब हम दुबारा कर लेते हैं।
मौत से भी भयावह किरदार तेरा है जिंदगी
छोड़ तक़रार अब मेरा को हमारा कर लेते हैं।
-Ramanuj Dariya