अगर कोई कुछ बोलना चाहता है और दिखावे के लिए उसे बोलने देकर सिर्फ उसकी बातों को सुनकर अनसुना कर देने का मतलब यही होता है की हम नियम से तो चल रहे है मगर करेंगे वही जो हम चाहते है। फिर चाहे हमारे विचार गलत या बुरे ही क्यों न हो।
यदि कोई अच्छी बात बोलना चाहता है, यदि कोई अच्छा परिवर्तन लाने की कामना रखता है, यदि कोई सही सुधार लाने की इच्छा रखता है तो उसे सिर्फ सुने नहीं अपितु उस व्यक्ति के कथन को समझना चाहिए और उसे साथ सहकार भी देना चाहिए।
-Kirtipalsinh Gohil