है ये ऐसी डोर जो बंध जाती है अपने आप एहसास है ये दिल का जो बिना कहे लगता है अपना सा....
रिश्तो की डोर है रेशम सी नाजुक रखना संभालके नही तो छूट जाती हाथ से....
फिर से पकड़ी हुए ये डोर पहेले जैसी रहती नही ओर हो जाती है नाजुक....
इसीलिए निभाओ बड़े दिल से और संभालो खूब सलुकाई से प्यार से....
-Shree