जुदाई से डरने से वाकिफ नहीं में,
पाने की उम्मीद से लड़ा हूं जिंदगी से,
नजदीकी वफा ए महुब्बत की मेने महसूस कर पाई है मैने,
गलतियों तेरी ही और रूठे अक्सर तो इल्ज़ाम खुद से होता है,
सागर पूरा सूख जाए अगर तो उम्मीद की जाती है जीने में,
आंखो में से आंसू को रोक नहीं लगा सकते तड़पते रोने में,
बेड़ियां जंजीर सब एक ही हिसाब का मशवरा किया इश्क़ में,
तुमसे जुड़ने के वास्ते क्या कैद किया दुनिया के किसी भी तबाही ने?
दिल से जुड़ा तेरा हर ख्वाब मेरे नजरो से मेरे सपने में,
मेरी निंदो में तू भी तो जगती है अरमान पूरे करने में,
लिखावट की बात है दरबदर तुझे रूह का ताल्लुक यू भी नहीं समझ आएगा,
तेरी और से बसी हर मजबूरियां धड़कती है हर बार रोक लगाने के लिए मेरे सीने में।
DEAR ZINDAGI 💞🌹