आप जो मेरी जानिब आने लगे
ख़्वाब आंखों में सर उठाने लगे
हुए क़दम उनके जो सू-ए-चमन
ख़ार गुल बन कर गुनगुनाने लगे
हुआ जो उनके आने का इशारा
वीराने भी चमन नज़र आने लगे
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-सन्तोष दौनेरिया
(जानिब- तरफ़, सू-ए-चमन - बग़ीचे की ओर, ख़ार - कांटे,)
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