थोड़ा पागल भी है, थोड़ा चंचल है वो ..
कुछ इन रंग बदलते मौसम जैसा ही है वो ।
न बोले कुछ तो लगे जैसे पतझर का कोई सुखा पेड़ हो वो..
और हसदे तो लगे जैसे बारिश का इंद्रधनुष हो वो ।
जब बरस पड़े तो लगे गुस्सेल बादल सा वो..
जब मीठा बोले तो लगे शीतल पवन सा वो ।
रो दे तो लगे बिन बुलाये सावन सा वो..
करे नादानियां तो लगे मस्ती में झूलती पेड़ की डालियो सा वो ।
कभी होजाता है बेरुख, सूरज की तपती धूप सा वो..
फिर बरसाता है प्यार बहोत, जैसे चाँद की सुंदर रोशनी हो वो ।
हरपल रंग बदलता है वो, हरबार नया सा लगता है वो..
फिर भी दिल को भाता है वो, तभी तो दिल मे रहता है वो ।