माँ
कयुं तुम को न थकने का वरदान मिला हे ?
कयुं तुम को सब सहने का उपहार मिला हे ?
कया तुम और हम अलग मिटी से बने हे ?
कभी न तुम को रूठा देखु ।
कभी न तुम को सोता देखु ।
कभी भी तुम को कुछ नहि चाहिए ।
कभी भी तुम को पुछा नहि जाये ।
सब की हां में तुम हां ही कहेती हसकर,
सब की पसंद तुम्हें याद रहती दिल पर,
अपनी इच्छा तुम न कहती खुलकर ।
कभी भी तुम को न रोता देखु ।
कभी भी तुम को न खोता देखु ।
सभी से तुम घुलमिल ही जाते ।
अपने लिए कभी समय न पाते ।
ईतनी बढ़िया खुबसूरती तुम कहा से लाते ?
दरिया जैसा दिल में सबको जगह हो देते ।
ऐ 'माँ ' तुम ईतनी सुंदर कैसे हों ?
दिल से और दिमाग से भी ईतनी
खुबसूरत कैसे हों ?
written by : Shital malani
15-10-2020
Thursday