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# विषय .खैल ..
मानव जीवन में ,अनेक खैल खैलता ।
मानव जीवन एक ,खैल का मैदान होता ।।
कोई हंसा कर ,दिल खुशहाल कर देता ।
कोई रुला कर ,दिल को दुःखी कर देता ।।
कोई बुरे कामो ,में फंसाने का खैल खैलता ।
कोई निगाहों से ,दिल धायल करता रहता ।।
कोई हैवानियत ,के खैल से जीवन तबाह करता ।
कोई पापाचार द्वारा ,धन लुटने के खैल खैलता ।।
कोई आंतकी बन ,चैन सुख लुटने का खैल खैलता ।
कोई महात्मा बन ,सभी धन लुटने का खैल करता ।।
स्वार्थी मानव ,अपने स्वार्थ के खैल सदा खैलता ।
जो ईश्वर को धोखा देता ,वो क्या खैल नही खैलता ।।
सारा जीवन विभिन्न खैल ,करने में बिताता ।
मरते समय फिर ,मौत के लिए तरसता रहता ।।
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