मेहनत की कीमत
ले लो ना बाबू ले लो ना चाचा ले लो ना भैया ताजी सब्जियां है आज ही तोड़ी है खेत से। इन्हीं शब्दों के साथ वह गरीब सब्जी बेचने वाला दुकानदार जो बाजार में सड़क के किनारे नीचे बैठकर सब्जियां बेचता है और दिन में लाखों अरमान सजाएं की शाम तक मेरी सारी सब्जियां बिक जाए जिससे मेरे घर का खर्चा चल सके और मेरा परिवार पल सके लेकिन शाम तक शायद उसके मेहनत की कमाई भी नहीं निकल पाती है ।अब बात ऐसी है कि हम बहुत ज्यादा और बहुत महंगी सब्जियां नहीं खरीदते हैं लेकिन हम उनकी सस्ती सब्जियां भी नहीं इसलिए कि वह नीचे बैठकर बेच रहा हैं तो उनकी सब्जियां अच्छी नहीं है ।और जो अपना स्टाल लगा रखे हैं जो सप्ताह दिन पुरानी सब्जियां पानी छिड़क कर बेचते हैं कलर लगा कर बेचते हैं और उनसे महंगी बेचते लेकीन हम अपना स्टैंडर्ड बनाने के लिए वहां से सब्जियां खरीदते हैं।हर गरीब दुकानदार से हम पैसा कम कराने की बात करते हैं लेकिन जिनकी अच्छी दुकानें हैं वहां पर आप लो चाहे ना लो वह एक ₹ भी कम नहीं करता।
तो आप लोगों से अनुरोध हैं की सड़क के किनारे जो टकटकी लगाए ग्राहकों के चेहरे देख रहे हैं अपनी सब्जियां बेचने के लिए तो कृपया उनके सब्जियां जरूर खरीदें। और उनके परिवार को पालने में इनका घर चलाने में इन के सपनों को साकार करने में इनकी मदद करें।
जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳
vp army ⚔️🇮🇳