मानसिक अवसाद
शिकायत बहुत है जिंदगी तुझ से
और जीने की कोई वजह भी नहीं दिखती।
थक गया है मन दुनियां के झमेलों से
कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखती।।
बेशक मरना हमारे हाथ में है पर
कायरों की मौत क्यों मरा जाये।
इस वेशकीमती जिंदगी को
यूँ ही बर्बाद क्यों करा जाये।।
चलो हम अपने आसपास ही
जीने की वजह ढूंढते हैं।
मुफलिसी में जो हंस कर जी रहे हैं
उनके हौसलों से जीना सीखते हैं।।
उनकी मुस्कानों से भर लेते हैं
अपनी जिंदगी के खालीपन को।
उनकी मदद करके सार्थक
कर लेते हैं अपने जीवन को।
एक पौधे को बना लेते हैं अपना मित्र
उससे करते हैं अपने मन की बात।
उसके रंगो और खुशबू को करते हैं
अपने दिल में आत्मसात।।
एक चिड़िया के लिए रखते हैं
कुंडे में छत पर पीने का पानी।
उसकी चीं चीं चूं चूं में सुनते हैं
जिंदगी की सरगम सुहानी।।
आत्मनिरीक्षण करो तो पाओगे
कि तुम्हारे पास तुम्हारे बहुत से अपने हैं
और बहुत सी वजहें हैं जीने की।
तुम्हारी जिंदगी की किताब में कई
दस्तखत व् मुहरें हैं खुदा की महरवानी की।।
तो आइये मानसिक अवसाद से बाहर निकल कर खुद जियें और दूसरों में भी जीने की आस जगाएं।
स्वरचित व् मौलिक
जमीला खातून
झाँसी उत्तर प्रदेश