यूं हूं क्यूं हूं
नहीं पता क्यों ह
मारी हूं खरी हूं गले तक भारी हूं
मन हूं तन हूं बेपरवाह मगन हु
दर्द हूं चुभन हूं मै अकेलापन हु
यूं हूं क्यूं हूं
नहीं पता क्यों हू
आज हूं कल हूं मै भटकता मन हूं
ख़ाक हूं राख हूं मै जलती आग हूं
बिष हूं प्यास हूं मै टूटी पतवार हूं
यूं हूं क्यूं हूं
नहीं पता क्यों हूं
@njali