बाते हजार की है मन ही मन में,
हादसे दर बदर होते है दिल ही दिल में।
गर है कोई लिफाफा मेरी जिंदगी में,
तू ना जाने मरते रहे साँस लेने में।
हसीन ख्वाब को दफनाने की तरकीब में,
है हर कोई इश्क़ के बातो में जूझने में।
दूरियों की तारीफ है मुझसे घर के वजूद में,
और जान ले जानी है तो क्या फर्क जान से मारने में।
मुझे रुला कर खुद जैसे बड़ा अफसोस करने में,
क्यू इतना खुश होता है रों रों के जीने में।
इस दस्तूर को किताबी पन्नो में लिखने में, फिर
अहेसास की तरह यादों में याद करोगे पागल बनने में।
DEAR ZINDAGI 💞