गमों की बौछार बढ़ी दिन-ब-दीन,,,!
नुमाइश की खुदा से दरबदर,,,!
कुदरत का मिला जान बन कर,,,,!
पाने की उम्मीद में खुद टूट कर,,,,!
नियति में लिखी लकीरों की बंदगी,,,,!
उसे संभालना ज़ुल्म दे रूह को जलाकर,,,,!
बदला आज तक नहीं फिर भी पागलपन मत कर,,,,!
तू उसके दिल में रहेगी एक जान से बढ़कर,,,!
DEAR ZINDAGI 🤗