शानदार कविता ...
# विषय .दिल ****
दिल रात दिन क्यूँ रोता ,मुझे कुछ पता नही ।
हवा सर् सर् क्यूँ गाती ,मुझे कुछ पता नही ।।
भंवरा फूलो पर मंडराते ,क्यूँ गाता मुझें पता नही ।
नदियाँ कल कल क्यूँ गाती ,मुझे कुछ पता नही ।।
कोयल की कुहूँक क्यूँ प्यारी ,लगती मुझे पता नही ।
प्यार में आँखें क्यूँ बरसती ,मुझे कुछ पता नही ।।
प्यार में हीर रांझा क्यूँ तडपे ,मुझे कुछ पता नही ।
भगवान ने दिल दिया ,यह क्यूँ रोता मुझे कुछ पता नही ।।
स्वाति नक्षत्र की एक बुंद के लिए ,चातक क्यूं प्यासा रहता मुझे पता नही ।
प्यार पल में क्यूँ हो जाता ,मुझें कुछ पता नहीं ।।
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