कुछ शेर अर्ज कर रहा हूँ.....
मेरी खैरियत पूछने की जरूरत नही
मरूंगा भी तो सबसे ज्यादा तुम रोओगी।।
तेरे हर दर्द की वजह मै हूँ शायद
माफ करना यदि कभी दिल दुखाया हो।।
साहिब मैंने एक गुनाह किया है
तुम से इश्क बेपनाह किया है।।
मेरा दर्पण भी अब हँसता है मुझ पर
यह देखो हारकर भी कैसा हँस रहा है।।
यूँ तो कोई गिला शिकवा नही जिंदगी से
बस आज तक जो चाहा वो हम पा न सके।।
"एक दूसरे से दूर है शायद दरम्यान मजबूरियाँ ने जगह बना ली होंगी......"
©®शुभेन्द्र सिंह संन्यासी