# कविता *** , # विषय . उपवन *** मेरा दिल उपवन सा है ,कभी आकर उसे महक देना ।
अपने स्नेह की बारिश से ,उसे हरा भरा बना जाना ।।
मेरा दिल उपवन सा महके ,ऐसी प्रीत जगा जाना ।
फूलों की तरह खिल कर ,जीवन बगियां खिला जाना ।।
अभी कोरोना के भय से मुरजाया ,आ के खिला जाना ।
तुम्हें देखे बहुत समय हुआ ,चाँद सा मुखडा दिखा जाना ।।
सदा उपवन सी खिलती रहना ,कभी मुरजाने मत देना ।
सारे गमो को भुल जाऊँ मैं ,ऐसा चमन खिला जाना ।।
प्यासी आँखों को अपने हुस्न के ,दीदार करवा जाना ।
तभी यह उपवन महकेगा ,इतना उपकार जता जाना ।।
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