ऐ लड़का उसको देख था,वो लड़की नकाब में होती थी,
उस नकाब को देखकर लड़का कहेता था, ऐ परदा नसी परदा उठा मेरी महोब्बत कबुल कर जलवा दिखा,
लडकी नकारके चलीं जाती थी,
कोई जवाब नहीं देतीं थी,
लड़का बड़ा अफ़सोस रहे ता था,
हर रोज लडकी देख ता था, यहि जुमला कैसा था,
ऐ परदा नसी परदा उठा मेरी महोब्बत कबूल कर जलवा दिखा, लडकी नकारके चली जाती थी,
तीस रोज ऐ परदा नसी परदा उठा मेरी महोब्बत कबूल जलवा दिखा था अगर तुने जलवा नही या में ख़ुदखुशी कर लूँगा,
चोठे रोज लड़की गली से गुजरी मनचला नहीं दिखा,
लड़की को बहुत अफ़सोस हुवा लोगों पूछा कहाँ है, उन लोगों बताया बेटी तुम्हारे गम में उसने तो खुदखुशी कर ली,
तो लडकी उसकी कब्रर गयी, जा कर कहने लगी,ऐ मेरे गुमनाम आशिक आई हु तेरी मज़हार पर - ऐ मेरे गुमनाम आशिकी आई हु तेरी मज़हार
ले रूखसे नकाब हटा दिया जी भर के दिदार कर,उस कब्रर में से आवाज आई,
या ख़ुदा ऐ केसा तेरा उनसाफ है,
आज में परदे में हु वो बे नकाब में है।।
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी😭❣
#तुम्हारा