# शानदार कविता पढ़े .......
# विषय .परखना *****
जीवन में दुसरों के अवगुणों ,को देखता आया ।
पर खुद के अवगुण देखना ,सुधारना रह गया ।।
दूर के रिश्तेदार को ,सदा निभाता ही आया ।
पर पास के रिश्तें ,सदा निभाना भुल गया ।।
काबा काशी चार धाम ,के पत्थर पुजता आया ।
पर सच्चे दिल के ईश्वर ,को पुजना भुल गया ।।
उम्र भर सदा ,पाई पाई का हिसाब जोडता आया ।
पर खुद की क्या कीमंत है ,उसे परखना भुल गया ।।
दो किताबे पढ़ कर ,खुद को होशियार समझ बैठा ।
पर सच्चे अर्थो में ,व्यवहारिक ज्ञान परखना भुल गया ।।
जिदंगी सारी यूँ ही ,भागदौड़ में जीता आया ।
पर जिदंगी का सही अर्थ ,समझना भुल गया ।।
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