*क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है । जिसके जीवन में क्षमा है , वही महानता को प्राप्त कर सकता है* । क्षमा हमें झुकने की प्रेरणा देती है । आज हम अहंकार के वशीभूत होकर जी रहे हैं , अहं की पट्टी ने हमारे देखने सुनने की शक्ति खत्म कर दी है । हम चाहकर भी इससे मुक्ति नहीं पा पाते । *हम अपने जीवन में अहं को छोडकर अपने से छोटा हो या बडा , अपने किए ,अपने प्रति किए गए या हो गए गलत कार्य के लिए क्षमा मांगे और क्षमा करने का भाव भी मन में रखें* ।
" सुप्रभात जी "
**जय सियाराम जी**