पाकर सारी खुशियां फिर भी कहीं थोड़ी लुफ्त हो रही है,
रूह से रूह मिलने के बाद भी कहीं दिल में दर्द चुभ रहे है।
बसाई दुनिया में, थोड़ी सी तकलीफ़ जिस्म को हो रही है,
चली ना जाए कहीं, ये दिल जज्बात बयान कर रहे है।
रूठ जाना अधिकार है इश्क़ के महोत्ताज के कई सिकवे है,
गुस्सा हो कर भी दिल रों पड़ा बोल ते वक़्त ये कमजोरी है।
आंखो में से निकल रहा बूंद बूंद पानी जो तेरी कमी है,
अल्फ़ाज़ टूट टूट कर बिखर जाया करते ये चाहत लाज़मी है।
में तेरे बिना रह नहीं सकता ये जहाँ में बता दूँ कैसे।
जताना नहीं पर बता दिया गया हर हाल, बस ये तो जिदंगी है,
नही चल पाएगा सफ़र अल्फाज़ो का बिन तेरी दिल्लगी के,
बस तू थम जा, एक लफ्ज़ भी ना बोल ये ख़ामोशी ही मेरी बंदगी है।
DEAR ZINDAGI 😔