रात और चांद में जब सरगोशी होती है
याद से दिल की हम आगोशी होती है
अपना घर छोड़ा है या उसका दर छोड़ा
उसके बाद तो खानाबदोशी होती है
बौझ वफा का हमने उठाया या तुमने
हमसफरों में यह हमदोशी होती है
बस्ती वाले ऐसे खौफजदा कब थे
अब तो खुद से भी सरगोशी होती है
good night