ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी जिस दिन हमसफ़र खोया था,
उसने उस दिन वृद्धश्रम का रास्ता बच्चों ने ही दिखा दिया,
आखिर वक्त का इंतजार करतीं हैं ,
उस माँ की सांसे अब ,
जीने की चाहत भी यूं रूठ है उससे जब,
बस चंद दिनों के लिए, मौखौटा उसने भी पहन लिया,
दिल में गम लिए,होटों से मुस्करा लिया ।।
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी👬