बड़ी भीड़ है यहाँ और वो साथ भी नही है
मेरे हिस्से में शायद वो मुलाकात ही नही है
मैं ढूँढ रहा हूँ तुझे बेखबर इन गलियों में
शायद इन गलियों में वो बात ही नही है
किसी ने कहा मोहब्बत के सताये लगते हो
ये कैसा दिल है तुम्हारा ,धड़कन साथ ही नही है
टूट कर गिर गए फल भी शाख से
ये कैसा पेड़ है जिसको प्यास ही नही है
बूँद - बूँद बरसती रही वो आँखों से मेरी
ये कैसा सावन है जिसमे बरसात ही नही है
खोल डाली आज सारी चिट्ठियाँ उनकी
ये कैसी कलम थी जिसका कोई निशान ही नही है..!!
🖤🖤🖤
पागल दिवाना
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