यह सोच की एक स्त्री को जीने के लिए एक पुरुष की आवश्यकता होगी ही, बिना पुरुष की सहायता के स्त्री कुछ नही, यह मानसिक अपंगता पूर्ण सोच का परिणाम स्वरूप #विधवा #सधवा की सामाजिक स्थिति को बल मिलता है।
किन्तु ऐसा कहा जाता है कि स्त्री और पुरुष गृहस्थी की गाड़ी के दो पहिये है यदि किसी गाड़ी का एक पहिया निकल जाए या टूट जाये तो गाड़ी छोड़ देते है क्या? उसे कोषते है क्या ? नही ना
उसी तरह से जब एक स्त्री का साथी न रहे तो उसे दूसरे साथी का हाथ थाम लेना चाहिए।
यदि ऐसा होने लेगे तो किसी भी स्त्री को #विधवा का अभिशापित जीवन न जीना पड़े।
जय शिव शम्भू
#विधवा