"वाह री तेरी छम छम ,यहां निकला जाए मेरा दम दम"
एक गांव में एक परिवार था जहां बूढ़े दादाजी- दादीजी ,बेटा बहू और एक पोता था, तो जैसे ही दादी का स्वर्गवास हुआ ,वैसे ही बहू अपने ससुर जी को अच्छे से रोटी पानी नहीं खिलाती थी। उन्हें बासी रोटी देती थी खाने को तो वो कुछ खाते थे तो कुछ रोटियों को बिस्तर के नीचे डाल देते थे।ऐसा ही कुछ समय बाद पोते की शादी हुई,और नई बहू पढ़ी - लिखी, संस्कारी थी।तो अपने पैरो में घुंगुरू वाली पायल पहनती थी।तो जब जब वो दादाजी के पास से गुजरती ,दादाजी हमेशा बोलते - "वाह री तेरी छम छम ,यहां निकला जाए मेरा दम दम",वो हमेशा सोचती की ऐसा दादाजी क्यों बोलते है,उसन घर में सबसे सासुमा से पुछा ,तो उन्ने कहा छोड़ो ना बूढ़ा सटिया गया है,फिर एक दिन उसने खुद दादाजी से पूछा कि आप ऐसा क्यों बोलते हो,तो दादाजी ने कहा शशशश.....और पूरा बिस्तर पलट दिया जहां पे सारी रोटी जमा थी,तो बहू सब समझ गई।और उस दिन के बाद नई बहू ने दादाजी को रोज चुपके से खाना दिया।कुछ समय बाद दादाजी का b स्वर्गवास हो गया जाते जाते वो नई बहू को ढेरों आशीर्वाद देकर गए।।।कुछ समय बाद सासुमा भी कमजोर हो गई,उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया,तब नई बहू ने उन्हें खाना दिया,तो खाना और कुछ नहीं वहीं बासी रोटी थी,जो दादाजी ने जमा की थी,तो सासुमा ने बोला ये क्या है,तो उन्होंने अपने पति और बेटे से बोला की देखो नई बहू मुझे केसा खाना देती है,तब उनहोने नई बहू से पूछा तो उसने पूरी घटना बताई ,तब उन लोगो को बहुत गुस्सा आया,सासुमा पर ।तब उन्होंने नई बहू का ही समर्थन किया।फिर सासुमा ने अपनी गलती कि क्षमा मांगी।।।।इसलिए कहते है आप जैसा करोगे ,एक दिन वो आपके पास लौटकर जरूर आएगा।।।।karma is bitch.....