शायद गम भुलाने की दवा कोई हमे बतलाए
फिर इस दर्द-ए-दिल का इलाज मिल जाए
हर कोई कहता रहा भूलना ही अच्छा हे गम के किस्से को
कैसे समजाये इस मन को जो गम को ही गले लगाए बैठा है
भुलाना तो बहुत चाहते है हर उस गम के किस्से को
लेकिन पता नही वो आंखों से ओझल क्यों नही होता है