इश्वर की रची इस सृष्टि में कुछ भी और कोई भी कुरूप नहीं है।
चींटी से लेकर हाथी तक, चिड़िया से लेकर बाज तक, नर से नारी तक, बच्चे से बूढ़े तक; सब अपने आप में रूपवान है।
ये तो उस कुरूपी सोच का दोष है जो इश्वर की रची सुंदर सृष्टि में खोट ढूंढ़ती है।
यहां कीचड़ में सुंदर कमल खिलते है और सुगंध से भरा गुलाब भी कांटो में खिलता है।
#कुरूप
#ugly