ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी अल्लाह-ये
उस गुल की कलाई की नज़ाकत
बलखा गई जब भद्दा पड़ा रंग-ए-हिना का,,,
नज़ाकत कोसती है मुझ को क्या क्या
तबीअत आई अच्छी नाज़नीं पर
सँभल सँभल के तो चलता है वो सितारा भी
तुम्हारी जैसी नज़ाकत से कम निकलता है,,,!
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी⚘
#भद्दा