क्यूँ तुम्हे कुछ दिखा नहीं?
और से बढ़कर सिर्फ तुमसे दोस्ती ज्यादा निभाई थी
हर रोज मेरे साथ साथ तेरे लिये भी तो डिब्बा आता था
मेरी चाय के पाटर्नर सिर्फ तुम ही तो थे
क्यूँ तूने कभी ये नहीं सोचा के
जो इंसान अपनी चॉकलेट किसी के साथ नहीं बांटता
वो सिर्फ तूझे ही खाने को देता है
जिसे अपने असाइन्मेंट पूरा करने मे नानी याद आजाती थी
वो तेरे असाइन्मेंट रातभर जाग कर पूरे करता है
क्यूँ तुम्हे कभी दिखा नहीं
मेरे बगल वाली सीट खाली होती थी जिसपे तेरे आलावा
किसी और को कभी भी बैठ ने की इज़ाज़त नहीं थी
तेरे किसी चीज के लिए मना करने पर या
तेरे ना आने की खबर सुन कर मेरा उदास होना
तेरी किसी और के साथ नज़दीकिया बढ़ाते देख मेरा गुस्सा होना
क्यूँ तुम्हे कुछ महसूस नहीं हुवा
तुम्हे कुछ होने से तेरी फ़िक्र में मेरे रोने पर
सिर्फ तेरे लिये सबसे लड़ने पर
तुम्हे एक टक देखना और तेरे देखते ही नजरें चुराने पर
मेरे लिये हमारी दोस्ती दोस्ती से बढ़कर है
क्यूँ तुम्हे कभी कुछ ऐसा लगा नहीं
क्यूँ तुम्हे हरबात बतानी पडती है
ठीक है तो यही सही सब बाते बतायेगे
पर तब जब तुम्हे ये मंज़ूर हो
तुम सुनने के लिये तैयार हो तब
नहीं तो फिर तुम्हारी दोस्ती ही सही।
_ Chandrika Gamit